आज के इस डिजिटल दौर में जब सारा देश तकनीक की मदद से चांद को चूम रहा है, तब भला बिहार कैसे पीछे रह सकता है। दोस्तों हम आपको बता दे कि बिहार उस राज्य का नाम है जिसका गौरवशाली इतिहास ज्ञान की गंगा के निरंतर बहते रहने का साक्षी रहा है। जी हां, हम बात कर रहे है प्राचीन काल के विश्व प्रसिद्ध विश्वविद्यालय नालंदा औऱ तक्षशिला के बारे में जो कि बिहार में है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए हाल ही में बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने राज्य के सभी विश्वविद्यालयों को हाल ही में डिजिटल करने की घोषणा की है।
यानी अब बिहार की सभी यूनिवर्सिटीज ऑनलाइन प्रक्रिया से जुड़ जाएंगी। प्रवेश से लेकर अनुसंधान तक हर काम अब काफी हाईटेक रूप से किया जाएगा। बता दे कि सभी विश्वविद्यालयों को चरणबद्ध तरीके से डिजिटलीकृत किया जाएगा। इसके साथ ही बिहार का वह गौरवशाली इतिहास फिर से खुद को दोहरा सकेगा, जिसमें इस राज्य ने देश को एक से बढ़कर एक प्रकांड विद्वान दिए थे।
बता दे कि बिहार की राजधानी स्थित मगध विश्वविद्यालय को सबसे पहले डिजिटल प्रोजेक्ट योजना से जोड़ा गया है। इसके साथ ही विश्वविद्यालय के सभी 44 अधीनस्थ महाविद्यालयो तथा विश्वविद्यालय मुख्यालय में बायो-मैट्रिक उपस्थिति मशीन लगाई गई है। इससे अब नदारद रहने वाले शिक्षक व कर्मचारियों की इस आदत पर रोक लग पाएगी।
इतना ही नहीं अब बिहार के सभी विश्वविद्यालयों में अनुसंधान के लिए इंटरनेट के द्वारा विदेशी विश्वविद्यालयों के शोधकर्ताओं की मदद भी ली जा सकेगी। बता दे विश्वविद्यालय में अब तक नामांकन, परीक्षा फार्म भरने, अंकपत्र और परीक्षा परिणाम आदि कार्यों में काफी गड़बड़ी की शिकायत आती है। ऑनलाइन होने से विश्वविद्यालय के कामकाज में पारदर्शिता आएगी, वहीं छात्र-छात्राओं को भी कई सुविधाएं मिल पाएगी।
